Wednesday, November 21, 2018

Sonai Rupai Wildlife Sanctuary [BEAUTIFUL]


Sonai Rupai Wildlife Sanctuary

Sonai Rupai Wildlife Sanctuary, Images of Sonai Rupai Wildlife Sanctuary

It’s awesome for a travel gig to recognize with different places around the world.

This post is definitely written in favor of all my travel gigs, who want to tour different places in this planet.

Let me be clear something first:  

This post is all about a [beautiful] wildlife sanctuary, situated in a north-eastern state of Indian sub-continent, Assam. And this beautiful wildlife sanctuary is Sonai Rupai Wildlife Sanctuary.

If you are looking up to your tourist destination this year then you will definitely love this post.

So are you interested?

If yes!

Then let’s start with……………………


Where it is Located

Sonai-Rupai wildlife sanctuary is located in Tezpur district of Assam state.

It covers total area around 220 km2, which is spared to the great foothills of Himalayas.

Generally it is situated 52 km away from the main town of Tezpur district.


Python in Sonai Rupai Wildlife Sanctuary


Why it is famous for

There are a lot of causes why it is an especial attraction to tourists.

Do you want to know which are they?

Then let’s take a look on its famous causes.

The very first one is its different types of plants and trees. According to some case studies these trees and plants are very hard to find in any other part of this planet, that is why this Sanctuary is a major attraction, especially for Botanist.

The 2nd Major cause is its animals and different species of birds. If you are a bird lover then you can enjoy here the beauty of colorful, multi-species birds, which are some revolting and some residential.

In animals Lesser Cat and Elephant are its main attraction. 


Animals

Here are some examples of animals founded in Sonai-Rupai :-

In Mammals: - You will find here Muntjac or Barking Deer, Tigers, Lesser Cat, Wild Boar, Leopard, Pygmy Hog, Swamp Deer and Gaur etc.

Reptiles: - Viper, Python, Greater Black Krait, Bengal Cobra, Striped Keel back etc.

In Birds: - You will find here beautiful Pelicans, White-Winged Duck, Hornbill, Kingfisher etc and in revolting birds Siberian Crane, Amur Falcon, Blue Tailed Bee Eater, Blue throat, Greater Flamingo and Bar Headed Goose etc.

Wild Boar Of Assam

Best time to tour

I highly recommend you for visiting Sonai-Rupai during only winter season, in the months from November to April.

Spring is not so good because of the lack of better condition of transport and communication.


History and Threat

Sonai Rupai wildlife Sanctuary comes under the administration of Forest and Environment department of Assam.

In 1998 this sanctuary was established by Assam government with an area of 175 km2 but later it was extended to 220 km2.

But though it has really a vast area property but now-a-days it is into a situation of major threat.

Why?

Because most of its area are highly denuded by extremist activities,

According to many professors, now-a-days Sonai-Rupai only left as a showcase of Assam government tourism program but the reality is most of tourist still afraid to visit there for the threat of extremist activities.

On the other hand illegal sawmills boosting up in the destruction of its forest system.

Many valuable trees and plants are cut off by some virtue less people. According to a study, a result comes out that every year; the figure of more than 1.5 crore’s rupees are left out to outside from here.

It is expected that the situation will improve very soon, but for this, the government will have to take strictest steps, and at the same time, the people here also have to change their vision by understanding the situation as well.


Conclusion

Now, you decide and plan your next tour. Whether you want to tour Sonai-Rupai or elsewhere and let me know by commenting below.

Tuesday, November 20, 2018

[Step-By -Step] कामाख्या मंदिर का रहस्य (kamakhya Mandir Ka Rahasya)

कामाख्या मंदिर का रहस्य (kamakhya Mandir Ka Rahasya)

kamakhya Mandir Ka Rahasya
Source

कामाख्या मंदिर तो पुरे भारतबर्ष में बिख्यात है। जो नहीं जानते उनमे से भी ज्यादातर लोगो ने इसके बारे में सुना होगा। 

लकिन क्या सबको इस मंदिर का वो अद्भुद रहस्य ज्ञात है?

अगर ज्ञात है तो बिलकुल अच्छी बात है लकिन अगर ज्ञात नहीं  है तो भी कोई बुरी बात नहीं; क्योकि आज हम इस लेख पर कामाख्या मंदिर के उस अद्भुद रहस्य (kamakhya Mandir Ka Rahasya) के बारे में ही बात करने जा रहे है। 

तो अगर आप जानना  चाहते हो तो हम आपको इस लेख पर स्वागत करते है। 

तो चलिए इस इतिहासिक मदिंर के रहस्य को उद्घाटन करते है [Step-By -Step]। 



कामाख्या मंदिर के रहस्य की अद्भुद कहानी (Kamakhya Mandir ke Rahasya ki Adbhud Kahani)

ये मंदिर भारतवर्ष के बिविन्न कोने में स्थित कामाख्या देवी के 51 शक्तिपीठो का एक अन्यतम है। ये माना जाता है की ये शक्तिपीठ इन सारे पीठो में से सबसे शक्तिशाली है। 

ये इतिहास से भी परे, भारतीय धर्मग्रंथो में लिखित कथा पर आधारित है। इस कथा के अनुसार असुरो के राजा दक्ष की एक बेटी थी ,जिसका नाम था सटी। सटी मन ही मन भगवान शिव से प्रेम करती थी, और ये मान सुकि थी की आगे चलके वही उनका पति परमेश्वर बनेंगे।  

लकिन यही एक कठिनाई आके सामने खड़ी हुई।  सायद आपमें से ज्यादातर लोगो को मालूम होगा की सटी के पिता यानि दक्ष राजा भगवान शिव के घोर सत्रु थे और उनको देवताओ में निम्न मान के घृणा भी करते थे। इसीलिए वे किसी भी हाल में ये नहीं चाहते थे की शिव से उनकी बेटी का विवाह हो। 

लकिन सटी देवी ने उनके पिता के इच्छा के विरोद्ध जाकर शिव से विवाह संपन्न किआ। यही पर ये कहानी एक नया मोर लेती है। 

एक बार दक्ष राजा ने एक यज्ञ अनुष्ठित किआ था। कहाँ जाता है की उस यज्ञ में सटी और शिव को निमंत्रित नहीं किआ गया था। लकिन फिर भी सटी देवी ने अपने पति से जिद करने के कारण, अनिमंत्रित होकर भी वे दोनों उस यज्ञ पर भाग लेने चले गए। 
Kamakhaya Mandir ke Rahasya ki Adbhud Kahani
Source

सटी-शिव  को एक साथ देखकर महाराज दक्ष को बहुत ही क्रोध आया। जिसके चलते उन्होंने सटी के साथ साथ शिव का भी घोर अपमान कर दिआ। 

आप जरा खुद सोचिए की उस समय सटी के मन क्या बिता होगा !

सटी देवी ने अपने ऊपर हुए अपमान को तो सह लिआ लकिन अपने पति के ऊपर हुए अपमान को वे सह न सकी। दूसरी ओर अपने जिद के ही वजह से यज्ञ में आने के कारन अपने पति का अपमान हुआ, जिसके लिए उन्होंने खुद को ही दोष दिआ। क्रोध, हताशा और अपने खुद के पिता के दुवारा हे अपमान के कारण वे काफी टूट गए। 

जिसके चलते भरी यज्ञ में उन्होंने खुद के ही देह पर अग्नि संयोग कर के अपना प्राण त्याग दिआ।  

सटी की देह त्याग से भगवान् शिव को बहुत ही क्रोध आया जिसके कारन उन्होंने दक्षराज की वध के लिए दो असुरो का सृजन किआ, उन दो असुरो का नाम था रूद्रकाली और भद्रकाली। इन असुरो ने दक्षराज का सिरकाटके उसका अंत कर दिआ।  

लकिन उसके बाद भी महादेव का क्रोध शांत नहीं हुआ। उन्होंने सटी के देह को अपने कंधे पर लेके पुरे बिस्व में बिनाश का तांडब नृत्य करना प्रारम्भ किआ। 

महादेव की इस तांडव नृत्य को देख देवताओ के साथ साथ मानव भी भयभीत होने लगे। जिसके चलते देवताओ ने भगवान् बिष्नु को कोई उपाय निकलने के लिए अनुरोध किआ। 

भगवान् बिष्नु ने भी महादेव की क्रोध को शांत करने के लिए बहुत सारे प्रयत्न किए लकिन वे भी बिफल हुए , बाद में कोई उपाय न देख बिष्नु ने अपनी सुदर्शन चक्र से सटी देवी की देह 51 खंड के बिभक्त कर दिआ।   

देह का ये 51 खंड भारतवर्ष के बिविन्न जगहों पर जा गिरे। इन 51 खंडो में से एक खंड, जो की सटी देवी का योनी भाग थी, असम राज्य के कामगिरी अर्थात  नीलाचल पहाड़ पर जा गिरे। 

कामगिरी नामके जगह पर देह का अंश गिरने के कारण इस जगह जो मंदिर बनायीं गयी उसको कामाख्या मंदिर के नाम से जाना गया। 

भारत के बिविन्न कोने में, जहा जहा देह का 51 भाग गिरा था हर जगह सटी देवी की एक मदिर है। लकिन इन सारे शक्तिपीठो के कामाख्या ही सबसे ज्यादा शक्तिशाली माणि जाती है। 


क्या आपको इस शक्तिपीठ के शक्तिशाली होने का कारण जानने की उच्छुकता है ?  दराचल इस शक्तिपीठ की शक्तिशाली होने के पीछे एक रहस्य छिपा हुआ है। तो चलिए बिना देर किए इसको भी जानने की कोसिस करते है। 


Kamakhaya Shaktipith ki Shaktisali Hone ka Rahasya
Source

कामाख्या शक्तिपीठ की शक्तिशाली होने का रहस्य (Kamakhya Shaktipith ki Shaktisali Hone ka Rahasya)

हमने आपको ऊपर बताया की आज जिस जगह कामाख्या मंदिर स्थित है उस जगह पर सटी देवी की योनी भाग गिरी थी। इस पीठ को शक्तिशाली मानने का मूल कारन भी यही पर छिपा हुआ है। 

दराचल बात यह है की महिला योनी ही जीबन का प्रबेश दुवार और आरम्भ भी होता है। ये हमारे कहने की बात नहीं है लकिन अगर आप कामाख्या मंदिर दर्शन करोगे तो आपको दिखाई देगा की वहाँ योनी की पूजा की जाती है। 

दराचल इस मंदिर के अंदर कोई भी देवी मूर्ति नहीं है, पुजारी लोग अंदर योनी आकृति की एक पत्थर की पूजा करते है। वे लोग ये मानके चलते है की मंदिर के अंदर योनि आकृति के जो पत्थर का अंश है वो कामाख्या देवी कीयोनी भाग ही है। 



कामाख्या मंदिर के अम्बुबासी मेला का रहस्य (Kamakhya Mandir ke Ambubasi Mela ka Rahasya)

सटी देवी का योनि भाग यहाँ पर गिरना ही अम्बुबासी मेला के आयोजन का मूल कारण है। 

ये सायद आप सभी जानते होंगे की हर महिला को मासिक धर्म पालन करना होता है। लकिन पौराणिक कथाओ के अनुसार कामाख्या देवी को हर साल में एक ही बार इस धर्म का पालन करना होता है। 

हर साल के जून महीने में ये देवी अपना स्त्री धर्म पालन करती है। कहा जाता है की इस समय पूरी पृथ्वी अपबित्र हो जाती है;  इसीलिए इन दिनों में खेती करना, पेड़ो से फल-सब्जी तोडना, पुरुष-महिला का सम्भोग करना ये सब मना होता है। 

देवी के भक्तगण इन दिनों में मंदिर के आस पास भीड़ करते है। इन दिनों में मदिर के पास ही स्थित ब्रह्मपुत्र नदी की पानी भी लाल हो जाती है। लोग ये मानते है की कामाख्या देवी के स्त्री धर्म के कारन ही इस नदी का पानी ऐसे लाल हो जाता है। 

फिर तीन दिन बाद जब देवी पुनर स्वभाबिक अवस्था में लौट आते है। तब पूरी पृथ्वी पुनर पबित्र हो जाती है। और इसी दिन को इस मेला का अंत भी माना  जाता है। 


निष्कर्ष (Conclusion)
आशा करता हूँ की ये लेख आपके लिए सहायक हुआ होगा। 

अगर आप चाहते है की इस लेख में और भी तत्य जोड़े जा सकते है ,तो आप हमें निचे टिप्पणी करके जरूर ज्ञात कीजिए। 

धन्यवाद। 

Sunday, November 18, 2018

ओरांग राष्ट्रीय उद्द्यान (Orang National Park)

ओरांग राष्ट्रीय उद्द्यान (Orang National Park)

Fishing Cat of Orang national park

नमस्कार दोस्तों ,

आपको allaboutassam.in  के इस नए लेख पर हम तहे दिल से स्वागत करते है। आशा करता हु की हमारा ये नया लेख आपको बहुत पछन्द आएगा।

दोस्तों आजके हमारे इस नए लेख का मूल विषयवस्तु है ओरांग राष्ट्रीय उद्द्यान (Orang National Park), जो भारतरास्त्र के उत्तर -पूर्बी राज्य असम में स्थित है।

ऐसा लगता है की आप इस उद्द्यान के बारे में जानने को इच्छुक हो। इस लेख में आपकी इसी इच्छुकता को पूर्ण करने की हम कोसिस करेंगे।

तो चलिए ओरांग राष्ट्रीय उद्द्यान (Orang National Park) के जनम से इस लेख को आरम्भ करते है।


ओरांग राष्ट्रीय उद्द्यान का जनम (Birth of Orang National Park In Hindi)  

Brahminy Duck of Orang national park

आज तक भारत में जितने भी राष्ट्रीय उद्द्यान बने है उन सबकी कोई न कोई कहानी जरूर है। लकिन उन सब कहानिओ में से जिस उद्द्यान की कहानी सबसे ज्यादा बिचित्र है वो है ओरांग राष्ट्रीय उद्द्यान की कहानी।

मित्रो क्या आपको मालूम है की 1900 सं से पहले ओरांग एक जनजाति इलाका था। जिसमे असम राज्य के बहुत ही पिछड़े हुए जनजाति लोग रहते थे। लकिन 20 वी सताब्दी की आरम्भ में वहा हुए इंफ्लुएंजा महामारी के वजह से बहुत सारे लोग मृत्यु की नींद सो गए और जो बाकि बचे थे उनको भी बाद में वो इलाका छोड़ना पड़ा। 

जनशून्य हो जाने के वजह से ब्रिटिश सरकार (1947 से पहले असम तथा पुरे भारत में ब्रिटिश हुकूमत चल रही थी ) ने उस इलाके को 1919 में Orang Game Reserve घोषित कर दिआ।

उस समय ये जगह बाघों के लिए काफी बिख्यात था जिसके कारन बाघ संरक्षण के लिए ब्रिटिश सरकार ने Orang Game Reserve की जिम्मेदारी राज्यिक बन बिभाग (State Forest Department) को सौप दिआ।

1947 में भारतवर्ष को स्वतंत्रता मिला ,लकिन स्वतंत्रता के 38 साल बाद भी इस जगह में कोई खास प्रगति नहीं मिली थी। फिर सं 1985 आये जब भारत राष्ट्र के सिआसत में राजीब गाँधी जी की शासन प्रतिष्ठित हुए।

ये उस समय खुसी बात थी की 1985 में सरकार दुवारा ओरांग को वन्यजीव अभ्यारण्य (wild life sanctuary) घोषित कर दिआ गया, लकिन 1991 सं में राजीब गाँधी  की हत्या हो जाने के कारन उनके सम्मान के खातिर ओरांग वन्यजीव अभ्यारण्य को राजीब गाँधी ओरांग वन्यजीव अभ्यारण्य (Rajib Gandhi wild life sanctuary) कर दिआ गया।

असम में इस घोषणा को ज्यादा समर्थन नहीं मिला, स्थानिअ लोगो ने काफी विरोध भी किआ।

ओरांग वन्यजीव अभ्यारण्य के लिए सबसे ज्यादा सुन्हेरा मौका आया सन 1999 को, एहि वो सन था जब इस इलाके को अचल सम्मान मिला, हाँ मई वही बोल रहा हु जो आप सोच रहे है यानि 1999 के 13 April को राजीब गाँधी ओरांग वन्यजीव अभ्यारण्य को ओरांग राष्ट्रीय उद्द्यान घोषित कर दिआ गया। और इसी कारन 1999 से अब तक ये उद्द्यान असम राज्य का गौरव बनके के डटा हुआ है।


ओरांग राष्ट्रीय उद्द्यान की अवस्थिति (Location of Orang National Park)

अगर हम इसकी अवस्थिति की बात करे तो ये जगह असम राज्य के जीबन की लकीर स्वोरुप ब्रह्मपुत्र नदी के तट पर स्थित है जो दो अति महत्वपूर्ण एतिहासिक जिल्ला दरंग और सोनितपुर में आता है।

कुल क्षेत्रफल (Total Area): - 78.81 वर्ग किलोमीटर।


ओरांग राष्ट्रीय उद्द्यान की कुछ चित्र (Orang National Park Photos)

Asian Elephant of Assam, Assam elephant
एशियाई हाथी (Asian Elephant)

Kingfisher bird in Assam's national park, bird images of Assam
किंग फिशर (King Fisher)



हिरन (Deer)

indian hog deer at orang
हॉग हिरन (Hog Deer)


कौन कौन सी प्राणिओ के लिए ओरांग राष्ट्रीय उद्द्यान बिख्यात है (Orang National Park is Famous for Which Animal)


ओरांग राष्ट्रीय उद्द्यान विशेष करके बिविन्न प्रजाति के पक्षी, एक सींग वाले गैंडो और बाघों के लिए बिख्यात है। लकिन अन्य जीब भी काफी मात्रा में पाए जाते है। कुछ जीबो के नाम कुछ इस तरह के है: -


  • एक सींग वाले गैंडे (Great Indian One Horn Rhinoceros)
  • एशियाई हाथी (Asian Elephant)
  • हॉग हिरन (Hog Deer)
  • जंगली सुकर (Pygmy Hog )
  • भारतीय पांगोलिन (Indian  Pangolin)
  • मछली पकड़ने वाली बिल्ली(Fishing Cat)
  • पल्लस ईगल (Pallas Fish Eagle)
  • किंग फिशर (King Fisher)
  • ब्राह्मणी बतख (Brahminy Duck)
  • बंगाल फ्लोरिकन (Bengal Florican)


असम में कौन सी भाषा बोली जाती है ? (Assam Mein Kaun Si Bhasha Boli Jati Hai?)

असम में कौन सी भाषा बोली जाती है ? (Assam Mein Kaun Si Bhasha Boli Jati Hai?)

Assam Mein Kaun Si Bhasha Boli Jati Hai

इस प्रश्न का सीधा सीधा उत्तर है असोमिआ भाषा

दराचल असम राज्य का मूल भाषा असोमिआ ही है, जो कथित भाषा होने के साथ साथ यहा का सरकारी लिखित भाषा भी है। 

आप सायद जानते होंगे की असम के असामिआ भाषा भारतीय संबिधान दुवारा स्वीकृत 22 भाषाओ का एक अन्यतम है, जिसको 1960 के 24 October को संबिधानिक भाषा का मर्यादा प्रदान किआ गया था। 

क्या आपमें जानने की इच्छा है की असोमिआ भाषा बंगाली, बिहारी, गुजराती, हिंदी  और भोजपुरी भाषा से क्यों इतना ज्यादा मिलता जुलता है ?

अगर आप सच्च में जानने की इच्छा रखते हो तो ये बहुत ही अच्छी बात है। 

क्योकि हम भी यहां आगे वही बात बिचार करने जा रहे है। तो चलिए से आरम्भ करते है............


असोमिआ भाषा क्यों बंगाली, बिहारी, गुजराती, हिंदी  और भोजपुरी इत्यादि भाषाओ से मिलता जुलता है ?

असम में कौन सी भाषा बोली जाती है

मित्रो दराचल भारत में दो ही प्रधान भाषिक समुदायो का शाशन चलता है। एक समुदाय है Indo-Aryan और दूसरा है Dravidian

है ना मजे की बात !

अब जानते है की Indo-Aryan समुदाय की भाषा कौन कौन सी है......। भाषा पंडितो के मुताबित असोमिआ, बंगाली, बिहारी, गुजराती, हिंदी  और भोजपुरी इत्यादि भाषा Indo-Aryan समुदाय से जुड़ा हुआ है।

और दूसरी ओर दक्षिण भारत में बोली जाने वाली भाषाए जैसे की तमिल ,तेलगु ,मलयालम इत्यादि Dravidian समुदाय से जन्मे हुए है।


ये बात दराचल एसी है जैसे की अलग अलग माता -पिताओ का संतान अलग अलग होता है लकिन उनके अपनों के बिच बहुत सारे एक जैसे गुण मौजूद रहते है।


अगर आपकी भाषा Indo-Aryan समुदाय जन्मे हुए है तो आपको असोमिआ, बंगाली, बिहारी, गुजराती, हिंदी, भोजपुरी इत्यादि भाषाए समझने में ज्यादा कठिनाई नहीं होंगी, लकिन मई निश्चित हु की आप बिना सीखे तमिल, तेलगु, मलयालम इत्यादि नहीं समझ सकते।

इसी तरह तमिल बोलने वाली व्यक्तिओ को भी तेलगु और मलयालम समझने में ज्यादा दिक्कत नहीं होंगी लकिन वे आसानी से बिना सीखे असोमिआ या हिंदी नहीं बोल पाएंगे।

अगर हम Indo-Aryan समुदाय के भाषाओ की बात करे तो साधारण भाषा में ये कहाँ जा सकता है की ये भाषाए एक दूसरे के भाई -बहन है और उसी तरह  Dravidian समुदाय से जन्मे हुए भाषाए भी एक दूसरे की भाई -बहन मानी जा सकती है।

जन्म होने का श्रोत एक होने के कारन असम का असोमिआ भाषा बंगाली, बिहारी, गुजराती, हिंदी  और भोजपुरी इत्यादि भाषाओ से काफी मिलता जुलता है , और इस बात को लेकर पंडितो में ज्यादा मतभेद नहीं देखि गयी है।


निष्कर्ष 

आशा करता हु की आपको हमारा ये लेख पचंद आया होगा।

अगर आपको लगता है ,की यहाँ कुछ छूट गयी है तो निचे हमें जरूर टिप्पणी कीजिएगा।

अगर आपको लगता है की आपके दोस्तों को भी इस लेख की जरूरत है तो शेयर जरूर कीजिएगा।

धन्यवाद।


Saturday, November 17, 2018

डिब्रु सैखोवा राष्ट्रीय उद्द्यान (Dibru Saikhowa National Park)

डिब्रु सैखोवा राष्ट्रीय उद्द्यान (Dibru Saikhowa National Park)

White Horse of Assam, Dibru Saikhowa National Park

दोस्तों, क्या आप जानते है की मानस और काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्द्यान के बाद डिब्रु सैखोवा असम (Assam) राज्य में स्थित तीसरा सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्द्यान है ?

बिलकुल दोस्तों !

डिब्रु सैखोवा राष्ट्रीय उद्द्यान (Dibru Saikhowa National Park) का क्षेत्रफल लगभग 350 वर्ग किलोमीटर इलाका है, जो असम के Tinsukia जिले से होकर Dibrugrah जिल्ला तक फैला हुआ है।

Tinsukia नगर से 12 किलोमीटर दूर अवस्थित ये उद्द्यान उत्तर से ब्रह्मपुत्र और लोहित नदी और दक्षिण से डिब्रु नदी के दुवारा घिरा हुआ है।

क्या आपको मालूम है की डिब्रु सैखोवा राष्ट्रीय उद्द्यान उत्तर-पूर्बी भारत में स्थित सबसे बड़ा  दलदल वन है ,जो गन्ने के जैसे पेड़, घास के मैदान और पर्णपाती जंगलो से बना हुआ है।

डिब्रु सैखोवा की प्रतिष्ठा (Established): - ये बात है सं 1890 की,...... जब आज की इस सुन्दर उद्द्यान के जनम की कहानी प्रारम्भ हुई। दराचल इसी सं में इस इलाके को संरक्षित बन घोसित किआ गया था। और उसके करीब 119 साल बाद सं 1999 में इस उद्द्यान को भारत सरकार दुवारा भारतबर्ष का राष्ट्रीय उद्द्यान का दर्जा प्रदान किआ गया।

Wild Birds of Assam's national Park

डिब्रु सैखोवा राष्ट्रीय उद्द्यान के बिख्यात होने का कारन (Dibru Saikhowa National Park is Famous For)

क्या आप जानना चाहते है की किन किन कारणों के वजह से ये जगह प्रकृति प्रेमिओ के बिच बिख्यात है ?

अगर हाँ............तो यहाँ मई आपको तीन मुख्य कारन बताता हूँ सुनिए :-

1. सबसे पहला कारन तो ये वन खुद है। क्योकि ये बन भारत के उत्तर-पूर्बी राज्यों में स्थित सबसे बड़ा सैलिक्स दलदल वन है। जो बिविन्न प्रकार के गन्ने जैसे पेड़ ,घास के मैदान और पर्णपाती जंगलो से बना हुआ है।

2. दूसरा कारन है यहां पर पाए जाने वाले जंगली घोड़े , क्या आपको मालूम है की डिब्रु सैखोवा उद्द्यान में दुनिआ का अन्यतम दुर्लव प्राणी सफ़ेद घोड़े पाए जाते है। सफ़ेद जंगली घोड़े देखने के लिए भी बहुत सारे पर्यटक हर साल यहां भ्रमण करते है।

3. तीसरा कारन है बिविन्न प्रजाति के मछलीआ और पक्षी। अगर आप सच्च में प्रकृति प्रेमी हो तो मई आपको बता देता हु की यहां पर आपको 350 बिविन्न प्रजाति के अलग अलग पक्षी (Birds) देखने को मिलेंगे और साथ ही में रंग-बिरंग, छोटे-बड़े 62 प्रजति के मछलीआ भी देख पाएंगे।  

Capped Monkey of Dibru Saikhowa National Park

डिब्रु सैखोवा राष्ट्रीय उद्द्यान के कुछ बिख्यात जानवर (Famous Animals of Dibru Saikhowa National Park)

  • बंगाल टाइगर (Bengal Tiger)
  • एशियाई हाथी (Asian Elephant)
  • सांबर हिरण (Sambar Deer)
  • गंगा डॉल्फिन (Gangetic dolphin)
  • बन्दर (Capped Monkey)
  • धूमिल तेंदुए (Clouded Leopard)
  • चीनी पांगोलिन (Chinese Pangolin)
  • हूलॉक गिब्बन (Hoolock Gibbon)
  • हिमालयन बड़ी गिलहरी (Himalayan Giant Squirrel)
  • जंगल बिल्ली ( Jungle Cat)
clouded leopard of Dibru Saikhowa National Park, Images of Animals

डिब्रु सैखोवा राष्ट्रीय उद्द्यान भ्रमण का सबसे सही समय (Best Time to Visit Dibru Saikhowa National Park)

यदि आप डिब्रु सैखोवा भ्रमण करने के लिए सच्च में आग्रही हो तो मई आपको बोलूंगा की आप वहा गर्मिओ के मौसम में ना जाये, क्योकि ज्यादा बारिश होने के कारन वहा का यातायात व्यवस्था ख़राब सा हो जाता है। असम के किसी किसी राष्ट्रीय उद्द्यान में तो इस समय सैलानिओ के लिए भ्रमण निसिद्ध ही होता है।

इसीलिए यदि आप जाना चाहते हो तो आपके लिए November महीने के आरम्भ से April महीने के अंत तक अच्छा समय होगा। क्योकि इस समय यातायात व्यबस्था काफी सकुशल रहता है।

और एक बात, इसी समय पर दुनिआ के बिविन्न कोने से परिभ्रामी पक्षी यहां पर आते है, जिसके कारन पक्षी प्रेमिओ के ;लिए ये समय बेहतरीन मानी जा सकती जाती है।

Friday, November 16, 2018

12 Rarest Animals for Which Nameri National Park is Famous


12 Rarest Animals for Which Nameri National Park is Famous

nameri national park is famous for which animal


Do you know that after Manas, Kaziranga and Dibru-Saikhowa national parks, Nameri is the fourth largest national park in Assam?

Yes my friend!

The Nameri National Park has spread around 200 square kilometer areas of Assam’s Tezpur district, which can be considered as a huge volume from geographical point of view.

Friend, we are aware that you want to know about the animals of Nameri National Park, for which it is famous among tour gigs.

So, in this post we prepare a list of 12 rarest animals generally founded in Nameri National Park.

Animals are: -

elephant of assam

1. Elephant: - Nameri National park is especially famous for two most powerful animals, where one is Tiger and another is Elephant, this is considered as the best place for wild elephants.


2. Dhole: - Simply Dhole is known as a type of wild dog.

tigers of nameri national park

3. Tiger: - Tigers are especially protected in Nameri National Park via the great Project of 1973’s Project Tiger”.


4. Capped Monkey: - it’s a very Langur of very primary monkey family.



Clouded leopard of Assam's nameri national park

5. Clouded leopard: - It is an animal rarely founded in the foothills of Himalaya. Clouded leopard is in the red list of IUCN since 2008, because it is about to extinct.

6. Pygmy Hog: - According to some surveys Pygmy Hog is the world rarest animals. At present time its world population is around 150. This animal is founded in the jungles of India, Pakistan, Bhutan and Nepal.

Lepord of Assam's national park

7. Leopard: - Leopards is a carnivore’s animal, which is from the part of Panther family.


8.  Somber Deer: - Somber Deer is a grey color big deer, founded in India. It is a red listed animal by IUCN since 2008.

Sloth Bear of Assam

9. Sloth Bear: - This animal is also in the red list of IUCN because of its lake quantity. Sloth Bear is a bear generally founded in Indian sub-continent.



10. Muntjac: - Muntjac is a type of deer from small deer genus family. This is also known as barking deer. Muntjac is one of the earliest animals living in the world since 10-35 million years ago.

India Giant Squirrel


11. India Giant Squirrel: - It is large brown cream color Squirrel from Ratufa Squirrel family; founded in India and other native countries of South Asia.

12. Gaur: - It is a large Indian Bison, Which has been under the red list of IUCN since 1986.


In Nameri National Park, you will find the rarest animal of the entire world. It is not possible to see in any other corner in this planet. I Hope you will visit Nameri National Park soon and will enjoy the watching of these rare animals.




Top 3 Causes Why pobitora wildlife sanctuary is famous for


Why Pobitora Wildlife Sanctuary is Famous?

pobitora wildlife sanctuary is famous for

It seems you want to know, why Pobitora wildlife sanctuary is famous among tour gigs.

Great!

Because exactly the same thing here I am going to share with you.

In this post I will explain you top 3 Awesome things that been making Pobitora wildlife sanctuary quite famous among Assam tourism lovers.

So my first point is………………


One horn rhino of Pobitora


1. One Horn Rhinoceros: - Hey do you know that Assam is only the land in the planet of existence of one horn rhinoceros?

Yes!

Pobitora is situated in Assam state, if you visit this wildlife sanctuary, then you will find a descend number of one horn rhinoceros in that place.

This animal is really very beautiful and unique. According to a survey of 2014, every year 80% of tourist visits in Assam only have a one main greed and that is to see the beauty of this beautiful animal.

Now, point number 2………..


Black magic of Mayong


2. Magic of Mayong: - Mayong is another the cause why one should prefer to visit Pobitora.

Why?

Because it is the hub of black magical elements of Assam,

Mayong is a small village of Morigaon district where once Human sacrifice tradition was cried out in the worships of supernatural powers. (Pobitora falls in Morigaon district)

……..And a part of Mayong comes into Pobitora……

, if you want to go there then don’t worry, because now-a-days human sacrifice tradition is not used in worships.

Generally tourist prefers to visit Mayong for its magical history. However due to modernity these traditional believe has changed quiet a lot but if you want it then it’s still common to see some magical activities at that place.

Now point number 3………………………

Birds of Pobitora wildlife Sanctuary


3. Over 2000 species of Birds: - Do you love to see birds of different species?

If you really do, then……….

Pobitora will be great for you, because it is the home of over 375 different species of bird.

And in different seasons of winter and spring time over 1625 species of revolting birds comes here in every year.

It’s the best place for bird lovers and of course for photo shooting too.


So, these are the three main causes why an Assam tourism lover prefers to visit Pobitora wildlife sanctuary.

If you liked it…then……please comment below.

Thursday, November 15, 2018

मानस राष्ट्रीय उद्द्यान (Manas national park in Hindi)

मानस राष्ट्रीय उद्द्यान (Manas national park in Hindi)

tiger images of Manas national Park

दोस्तों क्या आपको मानस राष्ट्रीय उद्द्यान के बारे में जानने की इच्छा है ? 

ऐसा लगता है की आप बड़े उच्छुकता से इस लेख को पढ़ने आये है?

अगर हाँ............तो आपको हम बिलकुल निराश नहीं करेंगे। यहाँ आपको हम पूर्ण जोर लगाके मानस राष्ट्रीय उद्द्यान (Manas national park in Hindi) के बारे में ज्ञात करने की कोसिस करेंगे। 

आशा करता हूँ की  ये लेख आपको बहुत पचंद आएगा। 

तो चलिए सुरु से सुरु करते है............. 


मानस राष्ट्रीय उद्द्यान के नाम का रहस्य (The Mystery of the Name of Manas National Park in Hindi)

क्या आप जानते है की मानस राष्ट्रीय उद्द्यान का नाम मानस नदी के नाम पर रखा गया है? 

हाँ दोस्तों !

इसका मूल कारन यही है की इस अभयारण्य की अवस्थिति मानस नदी के तट स्थित है। 

मानस नदी (Manas Nadi) से जुडी एक अति सुन्दर कहानी हिन्दू पुराणों में लिखा गया है।  हिन्दू पुराणों के मुताबित ये नदी भगवान् शिव की पुत्री मनसा को निर्देशित करती है। 

मनसा सापो की देवी थी और इसी मनसा देवी की सम्मान के खातिर इस नदी को मानस नदी नाम दिआ गया
जो बाद में जाके आज  असम राज्य के महत्वपूर्ण मानस राष्ट्रीय उद्द्यान को प्रतिनिद्धित्वा कर रहा है। 

Elephant images of Manas national park, manas national park animals

मानस राष्ट्रीय उद्द्यान का जनम कैसे हुआ ? (How Manas National Park Was Born ?)

आज जिस जगह को हम मानस राष्ट्रीय उद्द्यान के नाम से जानते है उसका प्रारम्भ हुआ था सं 1928 के 1 अक्टूबर को, इससे पहले ये एक आरक्षित वन था। 1928 के बाद इसको अभयारण्य के रूप में जाना जाने लगा, उस समय  360 वर्ग किलोमीटर इलाके को लेकर ये अभयारण्य बनाया गया था। 

सं 1928 से लेकर 62 साल बाद सं 1990 को इस अभयारण्य को राष्ट्रीय उद्द्यान घोषित कर दिआ गया। 

क्या आपको मालूम है की मानस असम राज्य में स्थित राष्ट्रीय उद्द्यानो में सबसे बड़ा उद्द्यान है। हाँ दोस्तों, वर्तमान समय में इस इलाके का आयतन है 950 वर्ग किलोमीटर, हलाकि ये इलाका 2008 के 25 February के बाद ही बढ़ायी गयी। 

समय के साथ इस पार्क का बिस्तार कुछ इस तरह हुआ :- 

  • 1928 -1951 (360 वर्ग किलोमीटर)
  • 1951 -1956 (355 वर्ग किलोमीटर)
  • 1956 -2008 (950 वर्ग किलोमीटर)


Jungle owl image

अवस्थिति (Location )

ये उद्द्यान असम के बोडोलैंड इलाके में आते है , जो बारपेटा रोड (Barpeta Road) के बहुत ही समीप अवस्थित है। 

आपको ये जानना बेहद जरूरी है की मानस राष्ट्रीय उद्द्यान केबल असम में ही नही आते, बल्कि भारत के निकटवर्ती राष्ट्र भूटान में भी इसका एक हिस्सा आता है। 

क्या आप जानना चाहोगे की वहा इसको किस नाम से जाना जाता है ?  

अगर हां.................तो आपको जानने में खुसी होगी की वहाँ भी इसको मानस नाम से जाना जाता है लकिन फर्क सिर्फ इतना है की भूटानी लोग इसके नाम के आगे Royal शब्द का व्यबहार करते है , अर्थात Royal Manas National Park.
 
wild deer of Assam

मानस राष्ट्रीय उद्द्यान को अंतरराष्ट्रीय मर्यादा (International Respect to Manas National Park)

ये बहुत दुखद बात है की एक बार (सं 1992 ) मानस राष्ट्रीय उद्द्यान का नाम विश्व धरोहर स्थल (world heritage site) से बाहर किआ गया था, लकिन क्या आप जानते है की इसके पीछे कौन सी वजह थी? 

तो आप सुनिए मई बताता हूँ।.......... 

दराचल ये बात,  वहा के मूल बिद्रोही संगठन NDFB से जुड़ा हुआ है। 1985 में UNESCO दुवारा मानस राष्ट्रीय उद्द्यान को विश्व धरोहर स्थल घोषित करने के एक साल बाद बोडोलैंड में NDFB का जनम हुआ जो बोडो लोगो की स्वतंत्रता के लिए शसस्त्र आंदोलन करता था (Still in)। 

धीरे धीरे बोडोलैंड इलाके में Terrorist कार्य-कलाप बढ़ता गया ,जिसके कारन 1992 में UNESCO ने इस विश्व धरोहर स्थल को बिपद के ग्रास में बताया। तथा इसका नाम भी विश्व धरोहर स्थल (world heritage site) से हटाया गया। लकिन परिस्थिति धीरे धीरे ठंडा होने के कारन इसको पुनर 21 June 2011 को UNESCO के विश्व धरोहर स्थल में शामिल किआ गया। 

हलाकि अभीभी परिस्थिति पूर्ण रूप से सुधरी नहीं है।  

Barking deer photos

कुछ अति महत्वपूर्ण बाटे (Some Very Important Points) 

  • क्या आप जानते है की मानस राष्ट्रीय उद्द्यान के 950 वर्ग किलोमीटर इलाके का 840.04 किलोमीटर इलाका  मानस व्याघ्र संरक्षित क्षेत्र में परता है। जो की 1973 के बाघ संरक्षण प्रोजेक्ट का एक भाग माना जाता है।  


  • इस  उद्द्यान को तीन भागो में बाटा गया है, जो एक दूसरे से थोड़ा थोड़ा दूर बचता है।  एक है पनबारी, दूसरा है पाथस्ला और तीसरा है बारपेटा रोड। 


  • असम राज्य का मूल चिह्ना एक सींग वाले गैंडे सबसे ज्यादा मानस में ही पाए जाते है (काज़ीरंगा से भी ज्यादा)
  • ये पार्क बाघों के लिए पूरी दुनिआ भर में बिख्यात है। 



मानस राष्ट्रीय उद्द्यान में पाए जाने वाले कुछ जानवर 

  • भौंकने वाला हिरण(Barking Deer)
  • हाथी (Elephant)
  • बाघ (Tiger)
  • जंगली उल्लू (Jungle Owl)
  • हिरन (Deer)
  • एक सींग वाले गैंडे (One Horn Rhino)
  • ग्रेट हॉर्नबिल (Great Hornbill )
  • ईगल(Eagal)
  • हवासील (Pelican)
  • बुलबुल(Bulbuls)
  • बन मुर्गी (Red Junglefowl) इत्यादि।