Sunday, November 18, 2018

ओरांग राष्ट्रीय उद्द्यान (Orang National Park)

ओरांग राष्ट्रीय उद्द्यान (Orang National Park)

Fishing Cat of Orang national park

नमस्कार दोस्तों ,

आपको allaboutassam.in  के इस नए लेख पर हम तहे दिल से स्वागत करते है। आशा करता हु की हमारा ये नया लेख आपको बहुत पछन्द आएगा।

दोस्तों आजके हमारे इस नए लेख का मूल विषयवस्तु है ओरांग राष्ट्रीय उद्द्यान (Orang National Park), जो भारतरास्त्र के उत्तर -पूर्बी राज्य असम में स्थित है।

ऐसा लगता है की आप इस उद्द्यान के बारे में जानने को इच्छुक हो। इस लेख में आपकी इसी इच्छुकता को पूर्ण करने की हम कोसिस करेंगे।

तो चलिए ओरांग राष्ट्रीय उद्द्यान (Orang National Park) के जनम से इस लेख को आरम्भ करते है।


ओरांग राष्ट्रीय उद्द्यान का जनम (Birth of Orang National Park In Hindi)  

Brahminy Duck of Orang national park

आज तक भारत में जितने भी राष्ट्रीय उद्द्यान बने है उन सबकी कोई न कोई कहानी जरूर है। लकिन उन सब कहानिओ में से जिस उद्द्यान की कहानी सबसे ज्यादा बिचित्र है वो है ओरांग राष्ट्रीय उद्द्यान की कहानी।

मित्रो क्या आपको मालूम है की 1900 सं से पहले ओरांग एक जनजाति इलाका था। जिसमे असम राज्य के बहुत ही पिछड़े हुए जनजाति लोग रहते थे। लकिन 20 वी सताब्दी की आरम्भ में वहा हुए इंफ्लुएंजा महामारी के वजह से बहुत सारे लोग मृत्यु की नींद सो गए और जो बाकि बचे थे उनको भी बाद में वो इलाका छोड़ना पड़ा। 

जनशून्य हो जाने के वजह से ब्रिटिश सरकार (1947 से पहले असम तथा पुरे भारत में ब्रिटिश हुकूमत चल रही थी ) ने उस इलाके को 1919 में Orang Game Reserve घोषित कर दिआ।

उस समय ये जगह बाघों के लिए काफी बिख्यात था जिसके कारन बाघ संरक्षण के लिए ब्रिटिश सरकार ने Orang Game Reserve की जिम्मेदारी राज्यिक बन बिभाग (State Forest Department) को सौप दिआ।

1947 में भारतवर्ष को स्वतंत्रता मिला ,लकिन स्वतंत्रता के 38 साल बाद भी इस जगह में कोई खास प्रगति नहीं मिली थी। फिर सं 1985 आये जब भारत राष्ट्र के सिआसत में राजीब गाँधी जी की शासन प्रतिष्ठित हुए।

ये उस समय खुसी बात थी की 1985 में सरकार दुवारा ओरांग को वन्यजीव अभ्यारण्य (wild life sanctuary) घोषित कर दिआ गया, लकिन 1991 सं में राजीब गाँधी  की हत्या हो जाने के कारन उनके सम्मान के खातिर ओरांग वन्यजीव अभ्यारण्य को राजीब गाँधी ओरांग वन्यजीव अभ्यारण्य (Rajib Gandhi wild life sanctuary) कर दिआ गया।

असम में इस घोषणा को ज्यादा समर्थन नहीं मिला, स्थानिअ लोगो ने काफी विरोध भी किआ।

ओरांग वन्यजीव अभ्यारण्य के लिए सबसे ज्यादा सुन्हेरा मौका आया सन 1999 को, एहि वो सन था जब इस इलाके को अचल सम्मान मिला, हाँ मई वही बोल रहा हु जो आप सोच रहे है यानि 1999 के 13 April को राजीब गाँधी ओरांग वन्यजीव अभ्यारण्य को ओरांग राष्ट्रीय उद्द्यान घोषित कर दिआ गया। और इसी कारन 1999 से अब तक ये उद्द्यान असम राज्य का गौरव बनके के डटा हुआ है।


ओरांग राष्ट्रीय उद्द्यान की अवस्थिति (Location of Orang National Park)

अगर हम इसकी अवस्थिति की बात करे तो ये जगह असम राज्य के जीबन की लकीर स्वोरुप ब्रह्मपुत्र नदी के तट पर स्थित है जो दो अति महत्वपूर्ण एतिहासिक जिल्ला दरंग और सोनितपुर में आता है।

कुल क्षेत्रफल (Total Area): - 78.81 वर्ग किलोमीटर।


ओरांग राष्ट्रीय उद्द्यान की कुछ चित्र (Orang National Park Photos)

Asian Elephant of Assam, Assam elephant
एशियाई हाथी (Asian Elephant)

Kingfisher bird in Assam's national park, bird images of Assam
किंग फिशर (King Fisher)



हिरन (Deer)

indian hog deer at orang
हॉग हिरन (Hog Deer)


कौन कौन सी प्राणिओ के लिए ओरांग राष्ट्रीय उद्द्यान बिख्यात है (Orang National Park is Famous for Which Animal)


ओरांग राष्ट्रीय उद्द्यान विशेष करके बिविन्न प्रजाति के पक्षी, एक सींग वाले गैंडो और बाघों के लिए बिख्यात है। लकिन अन्य जीब भी काफी मात्रा में पाए जाते है। कुछ जीबो के नाम कुछ इस तरह के है: -


  • एक सींग वाले गैंडे (Great Indian One Horn Rhinoceros)
  • एशियाई हाथी (Asian Elephant)
  • हॉग हिरन (Hog Deer)
  • जंगली सुकर (Pygmy Hog )
  • भारतीय पांगोलिन (Indian  Pangolin)
  • मछली पकड़ने वाली बिल्ली(Fishing Cat)
  • पल्लस ईगल (Pallas Fish Eagle)
  • किंग फिशर (King Fisher)
  • ब्राह्मणी बतख (Brahminy Duck)
  • बंगाल फ्लोरिकन (Bengal Florican)


असम में कौन सी भाषा बोली जाती है ? (Assam Mein Kaun Si Bhasha Boli Jati Hai?)

असम में कौन सी भाषा बोली जाती है ? (Assam Mein Kaun Si Bhasha Boli Jati Hai?)

Assam Mein Kaun Si Bhasha Boli Jati Hai

इस प्रश्न का सीधा सीधा उत्तर है असोमिआ भाषा

दराचल असम राज्य का मूल भाषा असोमिआ ही है, जो कथित भाषा होने के साथ साथ यहा का सरकारी लिखित भाषा भी है। 

आप सायद जानते होंगे की असम के असामिआ भाषा भारतीय संबिधान दुवारा स्वीकृत 22 भाषाओ का एक अन्यतम है, जिसको 1960 के 24 October को संबिधानिक भाषा का मर्यादा प्रदान किआ गया था। 

क्या आपमें जानने की इच्छा है की असोमिआ भाषा बंगाली, बिहारी, गुजराती, हिंदी  और भोजपुरी भाषा से क्यों इतना ज्यादा मिलता जुलता है ?

अगर आप सच्च में जानने की इच्छा रखते हो तो ये बहुत ही अच्छी बात है। 

क्योकि हम भी यहां आगे वही बात बिचार करने जा रहे है। तो चलिए से आरम्भ करते है............


असोमिआ भाषा क्यों बंगाली, बिहारी, गुजराती, हिंदी  और भोजपुरी इत्यादि भाषाओ से मिलता जुलता है ?

असम में कौन सी भाषा बोली जाती है

मित्रो दराचल भारत में दो ही प्रधान भाषिक समुदायो का शाशन चलता है। एक समुदाय है Indo-Aryan और दूसरा है Dravidian

है ना मजे की बात !

अब जानते है की Indo-Aryan समुदाय की भाषा कौन कौन सी है......। भाषा पंडितो के मुताबित असोमिआ, बंगाली, बिहारी, गुजराती, हिंदी  और भोजपुरी इत्यादि भाषा Indo-Aryan समुदाय से जुड़ा हुआ है।

और दूसरी ओर दक्षिण भारत में बोली जाने वाली भाषाए जैसे की तमिल ,तेलगु ,मलयालम इत्यादि Dravidian समुदाय से जन्मे हुए है।


ये बात दराचल एसी है जैसे की अलग अलग माता -पिताओ का संतान अलग अलग होता है लकिन उनके अपनों के बिच बहुत सारे एक जैसे गुण मौजूद रहते है।


अगर आपकी भाषा Indo-Aryan समुदाय जन्मे हुए है तो आपको असोमिआ, बंगाली, बिहारी, गुजराती, हिंदी, भोजपुरी इत्यादि भाषाए समझने में ज्यादा कठिनाई नहीं होंगी, लकिन मई निश्चित हु की आप बिना सीखे तमिल, तेलगु, मलयालम इत्यादि नहीं समझ सकते।

इसी तरह तमिल बोलने वाली व्यक्तिओ को भी तेलगु और मलयालम समझने में ज्यादा दिक्कत नहीं होंगी लकिन वे आसानी से बिना सीखे असोमिआ या हिंदी नहीं बोल पाएंगे।

अगर हम Indo-Aryan समुदाय के भाषाओ की बात करे तो साधारण भाषा में ये कहाँ जा सकता है की ये भाषाए एक दूसरे के भाई -बहन है और उसी तरह  Dravidian समुदाय से जन्मे हुए भाषाए भी एक दूसरे की भाई -बहन मानी जा सकती है।

जन्म होने का श्रोत एक होने के कारन असम का असोमिआ भाषा बंगाली, बिहारी, गुजराती, हिंदी  और भोजपुरी इत्यादि भाषाओ से काफी मिलता जुलता है , और इस बात को लेकर पंडितो में ज्यादा मतभेद नहीं देखि गयी है।


निष्कर्ष 

आशा करता हु की आपको हमारा ये लेख पचंद आया होगा।

अगर आपको लगता है ,की यहाँ कुछ छूट गयी है तो निचे हमें जरूर टिप्पणी कीजिएगा।

अगर आपको लगता है की आपके दोस्तों को भी इस लेख की जरूरत है तो शेयर जरूर कीजिएगा।

धन्यवाद।


Saturday, November 17, 2018

डिब्रु सैखोवा राष्ट्रीय उद्द्यान (Dibru Saikhowa National Park)

डिब्रु सैखोवा राष्ट्रीय उद्द्यान (Dibru Saikhowa National Park)

White Horse of Assam, Dibru Saikhowa National Park

दोस्तों, क्या आप जानते है की मानस और काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्द्यान के बाद डिब्रु सैखोवा असम (Assam) राज्य में स्थित तीसरा सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्द्यान है ?

बिलकुल दोस्तों !

डिब्रु सैखोवा राष्ट्रीय उद्द्यान (Dibru Saikhowa National Park) का क्षेत्रफल लगभग 350 वर्ग किलोमीटर इलाका है, जो असम के Tinsukia जिले से होकर Dibrugrah जिल्ला तक फैला हुआ है।

Tinsukia नगर से 12 किलोमीटर दूर अवस्थित ये उद्द्यान उत्तर से ब्रह्मपुत्र और लोहित नदी और दक्षिण से डिब्रु नदी के दुवारा घिरा हुआ है।

क्या आपको मालूम है की डिब्रु सैखोवा राष्ट्रीय उद्द्यान उत्तर-पूर्बी भारत में स्थित सबसे बड़ा  दलदल वन है ,जो गन्ने के जैसे पेड़, घास के मैदान और पर्णपाती जंगलो से बना हुआ है।

डिब्रु सैखोवा की प्रतिष्ठा (Established): - ये बात है सं 1890 की,...... जब आज की इस सुन्दर उद्द्यान के जनम की कहानी प्रारम्भ हुई। दराचल इसी सं में इस इलाके को संरक्षित बन घोसित किआ गया था। और उसके करीब 119 साल बाद सं 1999 में इस उद्द्यान को भारत सरकार दुवारा भारतबर्ष का राष्ट्रीय उद्द्यान का दर्जा प्रदान किआ गया।

Wild Birds of Assam's national Park

डिब्रु सैखोवा राष्ट्रीय उद्द्यान के बिख्यात होने का कारन (Dibru Saikhowa National Park is Famous For)

क्या आप जानना चाहते है की किन किन कारणों के वजह से ये जगह प्रकृति प्रेमिओ के बिच बिख्यात है ?

अगर हाँ............तो यहाँ मई आपको तीन मुख्य कारन बताता हूँ सुनिए :-

1. सबसे पहला कारन तो ये वन खुद है। क्योकि ये बन भारत के उत्तर-पूर्बी राज्यों में स्थित सबसे बड़ा सैलिक्स दलदल वन है। जो बिविन्न प्रकार के गन्ने जैसे पेड़ ,घास के मैदान और पर्णपाती जंगलो से बना हुआ है।

2. दूसरा कारन है यहां पर पाए जाने वाले जंगली घोड़े , क्या आपको मालूम है की डिब्रु सैखोवा उद्द्यान में दुनिआ का अन्यतम दुर्लव प्राणी सफ़ेद घोड़े पाए जाते है। सफ़ेद जंगली घोड़े देखने के लिए भी बहुत सारे पर्यटक हर साल यहां भ्रमण करते है।

3. तीसरा कारन है बिविन्न प्रजाति के मछलीआ और पक्षी। अगर आप सच्च में प्रकृति प्रेमी हो तो मई आपको बता देता हु की यहां पर आपको 350 बिविन्न प्रजाति के अलग अलग पक्षी (Birds) देखने को मिलेंगे और साथ ही में रंग-बिरंग, छोटे-बड़े 62 प्रजति के मछलीआ भी देख पाएंगे।  

Capped Monkey of Dibru Saikhowa National Park

डिब्रु सैखोवा राष्ट्रीय उद्द्यान के कुछ बिख्यात जानवर (Famous Animals of Dibru Saikhowa National Park)

  • बंगाल टाइगर (Bengal Tiger)
  • एशियाई हाथी (Asian Elephant)
  • सांबर हिरण (Sambar Deer)
  • गंगा डॉल्फिन (Gangetic dolphin)
  • बन्दर (Capped Monkey)
  • धूमिल तेंदुए (Clouded Leopard)
  • चीनी पांगोलिन (Chinese Pangolin)
  • हूलॉक गिब्बन (Hoolock Gibbon)
  • हिमालयन बड़ी गिलहरी (Himalayan Giant Squirrel)
  • जंगल बिल्ली ( Jungle Cat)
clouded leopard of Dibru Saikhowa National Park, Images of Animals

डिब्रु सैखोवा राष्ट्रीय उद्द्यान भ्रमण का सबसे सही समय (Best Time to Visit Dibru Saikhowa National Park)

यदि आप डिब्रु सैखोवा भ्रमण करने के लिए सच्च में आग्रही हो तो मई आपको बोलूंगा की आप वहा गर्मिओ के मौसम में ना जाये, क्योकि ज्यादा बारिश होने के कारन वहा का यातायात व्यवस्था ख़राब सा हो जाता है। असम के किसी किसी राष्ट्रीय उद्द्यान में तो इस समय सैलानिओ के लिए भ्रमण निसिद्ध ही होता है।

इसीलिए यदि आप जाना चाहते हो तो आपके लिए November महीने के आरम्भ से April महीने के अंत तक अच्छा समय होगा। क्योकि इस समय यातायात व्यबस्था काफी सकुशल रहता है।

और एक बात, इसी समय पर दुनिआ के बिविन्न कोने से परिभ्रामी पक्षी यहां पर आते है, जिसके कारन पक्षी प्रेमिओ के ;लिए ये समय बेहतरीन मानी जा सकती जाती है।

Friday, November 16, 2018

12 Rarest Animals for Which Nameri National Park is Famous


12 Rarest Animals for Which Nameri National Park is Famous

nameri national park is famous for which animal


Do you know that after Manas, Kaziranga and Dibru-Saikhowa national parks, Nameri is the fourth largest national park in Assam?

Yes my friend!

The Nameri National Park has spread around 200 square kilometer areas of Assam’s Tezpur district, which can be considered as a huge volume from geographical point of view.

Friend, we are aware that you want to know about the animals of Nameri National Park, for which it is famous among tour gigs.

So, in this post we prepare a list of 12 rarest animals generally founded in Nameri National Park.

Animals are: -

elephant of assam

1. Elephant: - Nameri National park is especially famous for two most powerful animals, where one is Tiger and another is Elephant, this is considered as the best place for wild elephants.


2. Dhole: - Simply Dhole is known as a type of wild dog.

tigers of nameri national park

3. Tiger: - Tigers are especially protected in Nameri National Park via the great Project of 1973’s Project Tiger”.


4. Capped Monkey: - it’s a very Langur of very primary monkey family.



Clouded leopard of Assam's nameri national park

5. Clouded leopard: - It is an animal rarely founded in the foothills of Himalaya. Clouded leopard is in the red list of IUCN since 2008, because it is about to extinct.

6. Pygmy Hog: - According to some surveys Pygmy Hog is the world rarest animals. At present time its world population is around 150. This animal is founded in the jungles of India, Pakistan, Bhutan and Nepal.

Lepord of Assam's national park

7. Leopard: - Leopards is a carnivore’s animal, which is from the part of Panther family.


8.  Somber Deer: - Somber Deer is a grey color big deer, founded in India. It is a red listed animal by IUCN since 2008.

Sloth Bear of Assam

9. Sloth Bear: - This animal is also in the red list of IUCN because of its lake quantity. Sloth Bear is a bear generally founded in Indian sub-continent.



10. Muntjac: - Muntjac is a type of deer from small deer genus family. This is also known as barking deer. Muntjac is one of the earliest animals living in the world since 10-35 million years ago.

India Giant Squirrel


11. India Giant Squirrel: - It is large brown cream color Squirrel from Ratufa Squirrel family; founded in India and other native countries of South Asia.

12. Gaur: - It is a large Indian Bison, Which has been under the red list of IUCN since 1986.


In Nameri National Park, you will find the rarest animal of the entire world. It is not possible to see in any other corner in this planet. I Hope you will visit Nameri National Park soon and will enjoy the watching of these rare animals.




Top 3 Causes Why pobitora wildlife sanctuary is famous for


Why Pobitora Wildlife Sanctuary is Famous?

pobitora wildlife sanctuary is famous for

It seems you want to know, why Pobitora wildlife sanctuary is famous among tour gigs.

Great!

Because exactly the same thing here I am going to share with you.

In this post I will explain you top 3 Awesome things that been making Pobitora wildlife sanctuary quite famous among Assam tourism lovers.

So my first point is………………


One horn rhino of Pobitora


1. One Horn Rhinoceros: - Hey do you know that Assam is only the land in the planet of existence of one horn rhinoceros?

Yes!

Pobitora is situated in Assam state, if you visit this wildlife sanctuary, then you will find a descend number of one horn rhinoceros in that place.

This animal is really very beautiful and unique. According to a survey of 2014, every year 80% of tourist visits in Assam only have a one main greed and that is to see the beauty of this beautiful animal.

Now, point number 2………..


Black magic of Mayong


2. Magic of Mayong: - Mayong is another the cause why one should prefer to visit Pobitora.

Why?

Because it is the hub of black magical elements of Assam,

Mayong is a small village of Morigaon district where once Human sacrifice tradition was cried out in the worships of supernatural powers. (Pobitora falls in Morigaon district)

……..And a part of Mayong comes into Pobitora……

, if you want to go there then don’t worry, because now-a-days human sacrifice tradition is not used in worships.

Generally tourist prefers to visit Mayong for its magical history. However due to modernity these traditional believe has changed quiet a lot but if you want it then it’s still common to see some magical activities at that place.

Now point number 3………………………

Birds of Pobitora wildlife Sanctuary


3. Over 2000 species of Birds: - Do you love to see birds of different species?

If you really do, then……….

Pobitora will be great for you, because it is the home of over 375 different species of bird.

And in different seasons of winter and spring time over 1625 species of revolting birds comes here in every year.

It’s the best place for bird lovers and of course for photo shooting too.


So, these are the three main causes why an Assam tourism lover prefers to visit Pobitora wildlife sanctuary.

If you liked it…then……please comment below.

Thursday, November 15, 2018

मानस राष्ट्रीय उद्द्यान (Manas national park in Hindi)

मानस राष्ट्रीय उद्द्यान (Manas national park in Hindi)

tiger images of Manas national Park

दोस्तों क्या आपको मानस राष्ट्रीय उद्द्यान के बारे में जानने की इच्छा है ? 

ऐसा लगता है की आप बड़े उच्छुकता से इस लेख को पढ़ने आये है?

अगर हाँ............तो आपको हम बिलकुल निराश नहीं करेंगे। यहाँ आपको हम पूर्ण जोर लगाके मानस राष्ट्रीय उद्द्यान (Manas national park in Hindi) के बारे में ज्ञात करने की कोसिस करेंगे। 

आशा करता हूँ की  ये लेख आपको बहुत पचंद आएगा। 

तो चलिए सुरु से सुरु करते है............. 


मानस राष्ट्रीय उद्द्यान के नाम का रहस्य (The Mystery of the Name of Manas National Park in Hindi)

क्या आप जानते है की मानस राष्ट्रीय उद्द्यान का नाम मानस नदी के नाम पर रखा गया है? 

हाँ दोस्तों !

इसका मूल कारन यही है की इस अभयारण्य की अवस्थिति मानस नदी के तट स्थित है। 

मानस नदी (Manas Nadi) से जुडी एक अति सुन्दर कहानी हिन्दू पुराणों में लिखा गया है।  हिन्दू पुराणों के मुताबित ये नदी भगवान् शिव की पुत्री मनसा को निर्देशित करती है। 

मनसा सापो की देवी थी और इसी मनसा देवी की सम्मान के खातिर इस नदी को मानस नदी नाम दिआ गया
जो बाद में जाके आज  असम राज्य के महत्वपूर्ण मानस राष्ट्रीय उद्द्यान को प्रतिनिद्धित्वा कर रहा है। 

Elephant images of Manas national park, manas national park animals

मानस राष्ट्रीय उद्द्यान का जनम कैसे हुआ ? (How Manas National Park Was Born ?)

आज जिस जगह को हम मानस राष्ट्रीय उद्द्यान के नाम से जानते है उसका प्रारम्भ हुआ था सं 1928 के 1 अक्टूबर को, इससे पहले ये एक आरक्षित वन था। 1928 के बाद इसको अभयारण्य के रूप में जाना जाने लगा, उस समय  360 वर्ग किलोमीटर इलाके को लेकर ये अभयारण्य बनाया गया था। 

सं 1928 से लेकर 62 साल बाद सं 1990 को इस अभयारण्य को राष्ट्रीय उद्द्यान घोषित कर दिआ गया। 

क्या आपको मालूम है की मानस असम राज्य में स्थित राष्ट्रीय उद्द्यानो में सबसे बड़ा उद्द्यान है। हाँ दोस्तों, वर्तमान समय में इस इलाके का आयतन है 950 वर्ग किलोमीटर, हलाकि ये इलाका 2008 के 25 February के बाद ही बढ़ायी गयी। 

समय के साथ इस पार्क का बिस्तार कुछ इस तरह हुआ :- 

  • 1928 -1951 (360 वर्ग किलोमीटर)
  • 1951 -1956 (355 वर्ग किलोमीटर)
  • 1956 -2008 (950 वर्ग किलोमीटर)


Jungle owl image

अवस्थिति (Location )

ये उद्द्यान असम के बोडोलैंड इलाके में आते है , जो बारपेटा रोड (Barpeta Road) के बहुत ही समीप अवस्थित है। 

आपको ये जानना बेहद जरूरी है की मानस राष्ट्रीय उद्द्यान केबल असम में ही नही आते, बल्कि भारत के निकटवर्ती राष्ट्र भूटान में भी इसका एक हिस्सा आता है। 

क्या आप जानना चाहोगे की वहा इसको किस नाम से जाना जाता है ?  

अगर हां.................तो आपको जानने में खुसी होगी की वहाँ भी इसको मानस नाम से जाना जाता है लकिन फर्क सिर्फ इतना है की भूटानी लोग इसके नाम के आगे Royal शब्द का व्यबहार करते है , अर्थात Royal Manas National Park.
 
wild deer of Assam

मानस राष्ट्रीय उद्द्यान को अंतरराष्ट्रीय मर्यादा (International Respect to Manas National Park)

ये बहुत दुखद बात है की एक बार (सं 1992 ) मानस राष्ट्रीय उद्द्यान का नाम विश्व धरोहर स्थल (world heritage site) से बाहर किआ गया था, लकिन क्या आप जानते है की इसके पीछे कौन सी वजह थी? 

तो आप सुनिए मई बताता हूँ।.......... 

दराचल ये बात,  वहा के मूल बिद्रोही संगठन NDFB से जुड़ा हुआ है। 1985 में UNESCO दुवारा मानस राष्ट्रीय उद्द्यान को विश्व धरोहर स्थल घोषित करने के एक साल बाद बोडोलैंड में NDFB का जनम हुआ जो बोडो लोगो की स्वतंत्रता के लिए शसस्त्र आंदोलन करता था (Still in)। 

धीरे धीरे बोडोलैंड इलाके में Terrorist कार्य-कलाप बढ़ता गया ,जिसके कारन 1992 में UNESCO ने इस विश्व धरोहर स्थल को बिपद के ग्रास में बताया। तथा इसका नाम भी विश्व धरोहर स्थल (world heritage site) से हटाया गया। लकिन परिस्थिति धीरे धीरे ठंडा होने के कारन इसको पुनर 21 June 2011 को UNESCO के विश्व धरोहर स्थल में शामिल किआ गया। 

हलाकि अभीभी परिस्थिति पूर्ण रूप से सुधरी नहीं है।  

Barking deer photos

कुछ अति महत्वपूर्ण बाटे (Some Very Important Points) 

  • क्या आप जानते है की मानस राष्ट्रीय उद्द्यान के 950 वर्ग किलोमीटर इलाके का 840.04 किलोमीटर इलाका  मानस व्याघ्र संरक्षित क्षेत्र में परता है। जो की 1973 के बाघ संरक्षण प्रोजेक्ट का एक भाग माना जाता है।  


  • इस  उद्द्यान को तीन भागो में बाटा गया है, जो एक दूसरे से थोड़ा थोड़ा दूर बचता है।  एक है पनबारी, दूसरा है पाथस्ला और तीसरा है बारपेटा रोड। 


  • असम राज्य का मूल चिह्ना एक सींग वाले गैंडे सबसे ज्यादा मानस में ही पाए जाते है (काज़ीरंगा से भी ज्यादा)
  • ये पार्क बाघों के लिए पूरी दुनिआ भर में बिख्यात है। 



मानस राष्ट्रीय उद्द्यान में पाए जाने वाले कुछ जानवर 

  • भौंकने वाला हिरण(Barking Deer)
  • हाथी (Elephant)
  • बाघ (Tiger)
  • जंगली उल्लू (Jungle Owl)
  • हिरन (Deer)
  • एक सींग वाले गैंडे (One Horn Rhino)
  • ग्रेट हॉर्नबिल (Great Hornbill )
  • ईगल(Eagal)
  • हवासील (Pelican)
  • बुलबुल(Bulbuls)
  • बन मुर्गी (Red Junglefowl) इत्यादि।


Wednesday, November 14, 2018

काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्द्यान हिंदी में (kaziranga national park in hindi)

काज़ीरंगा  राष्ट्रीय उद्द्यान  हिंदी में(kaziranga national park in hindi)

Golden monkey image of Kaziranga national park , Assam

दोस्तों, जब आपसे ये पूछा जाता है की असम राज्य किन किन कारणों से दुनिआभर में बिख्यात है , तो आपके मन कौन सी मुख्य बाटे आती है?

हमारे अनुमान के मुताबित सायद ये तीन मुख्य बाते आती होंगी; प्रथम असम की चाय , द्वितीय असम का केंद्रीय उछब बिहू और तृतीय एक सींग वाले गैंडे। 

क्या आप जानते है की असम (Assam) में स्थित भारत के अन्यतम राष्ट्रीय उद्द्यान काज़ीरंगा इस अदभुत प्राणी के लिए दुनिआभर में बिख्यात है ? 

हाँ दोस्तों , ये सत्य है और साथ में ये भी सत्य है की असम के अलावा दुनिआ की और किसी भी हिस्से में एक सींग वाले गैंडे नहीं पाए जाते। यही वो कारण है जिसके वजह से हर साल लाखो सैलानी काज़ीरंगा भ्रमण करने आते है। 

दोस्तों क्या आप  काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्द्यान के बारे में (kaziranga national park in hindi) जानना चाहते  है? 

अगर  हाँ...............  

तो ये लेख, बिलकुल आपके लिए ही लिखा गया है , तो चलिए  इस बिशाल राष्ट्रीय उद्द्यान (kaziranga national park) के बारे में सुरु से सुरु करते है। 



Tigers of Kaziranga national park, Assam

काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्द्यान कहा स्थित है ? (Where is Kaziranga national park in Hindi?)

राष्ट्रसंघ के दुवारा 1985 में विश्व विरासत स्थल (World Heritage Site) के रूप में घोसित काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्द्यान स्थित है भारत के उत्तर-पूर्बी राज्य असम में। ये दराचल असम राज्य के तीन जिल्लो के हिस्सों में आता है। पहला तो है गोलाघाट (Golaghat) ,दूसरा है नागाओं (Nogaon) और तीसरा हिस्सा आता है कारबी आंगलोंग (Karbi Anglong) ज़िल्ले में। 



One horn Rhino images of kaziranga national park, Assam


काज़ीरंगा के जनम का अति सुन्दर कहानी (The Beautiful Story of  Kaziranga National Park's Birth)

इस सुन्दर कहानी का जनम होता है सं 1904 में जब ब्रिटिश भारत के viceroy लार्ड कर्ज़न और उनकी पत्नी मैरी कर्ज़न इस इलाके में एक सींग वाले गैंडे देखने के लिए आये थे। लकिन उनके पत्नी को बुरा लगा तब जब उनको वहा गैंडे देखने को नहीं मिले। 

शिकारिओं के दुवारा शिकार किए जाने की वजह से वहां गैंडो की संख्या कम होती जा रही थी। इस बात को समझ कर viceroy की पत्नी ने उन्हें इस इलाके को संरक्षण केरने के लिए जोर दिआ। और पत्नी के प्रति लार्ड कर्ज़न का जो प्रेम था उसी का परिणाम स्वरुप उन्होंने अपने पत्नी की बात रख लिआ। 

ये बात है सं 1905 के 1 जून की, जब वहा के 231 वर्ग किलोमीटर इलाके को Reserve Forest घोसित कर दिआ गया। 

समय बीतता गया और तीन साल बाद सं 1908 को इस संरक्षित इलाके को 231 वर्ग किलोमीटर से 384 वर्ग किलोमीटर तक बढ़ाया गया। इतिहास के मुताबित 1908 से 1938 तक इस इलाके में सामान्य लोगो का भ्रमण निषिद्ध था। लकिन 1938 के बाद यहां सैलानिओ का प्रबेश मंजूर किआ गया। 

दोस्तों, क्या आप जानते है की काज़ीरंगा को राष्ट्रीय दर्जा कब मिला ?

हाँ ये बिलकुल सत्य की सं 1974 के 11 February को भारत सरकार ने इस इलाके को काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्द्यान के रूप में घोसित कर दिआ। और जो पहले इस इलाके का परिमाण 384 वर्ग किलोमीटर था वो अब 430 वर्ग किलोमीटर तक बढ़ाया गया। 

मई ये मानता हु की ब्रिटिशो ने भारत तथा असम के ऊपर हुकूमत की थी , लकिन साथ ही में ये भी मानना आवयश्यक है की अगर ब्रिटश नहीं होते तो आज हम भारतीय जिस एक सींग वाले गैंडे को लेकर अपना गर्ब जाहिर करते है वो सायद नहीं कर पाते। इसीलिए हमे उनके प्रति अपना आभार जाहिर करना भी जरूरी है। 



Wild Boar images of Kaziranga national park, Assam


काज़ीरंगा किन किन अनोखे प्राणिओ के लिए बिख्यात है ? (Which are the unique animals for which Kaziranga is famous?)

ये सामान्य रूप से सबको ज्ञात है की काज़ीरंगा में दुनिआ का सबसे दुर्लभ प्राणी एक सींग वाले गैंडे पाए जाते है। 2018 में की गयी एक हिसाब के मुताबित काज़ीरंगा में गैंडो की संख्या है 2413, लकिन यही संख्या 2015 में थी 2400 , यानि 3 सालो में गैंडो के संख्या में इज़ाफ़ा आया 13 गैंडे, इसको बहुत ज्यादा अच्छा तो नहीं बोल सकते लकिन भाबिस्व के लिए ये काफी अच्छा संकेत है।  

काज़ीरंगा में बहुत ज्यादा संख्या में बाघ (tigers)पाए जाते है। सं 2006 में काज़ीरंगा को  बाघ संरक्षण प्रोग्राम का अंतर्गत किआ गया। 

बाघ और गैंडो के अलावा भी काज़ीरंगा में और सुन्दर सुन्दर प्राणी पाए जाते है। जैसे की - एशियाइ हाथी (Asian elephants), जंगली सूअर (Wild boar),  बरसिंह हिरण (Barasingha deer), पल्लस ईगल (Pallas's fish eagle), गोल्डन लंगूर (Golden Monkey), जंगली पानी भैंस (wild water buffalo), हॉग हिरण (Hog deer), भारतीय रोलर ( Indian roller), गुलाबी गले वाले तोते (Rose-ringed parakeets), बिविन्न प्रजाति के साप इत्यादि। 



Wild buffelo images in Kaziranga national park


काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्द्यान के ऊपर कुछ महत्वपूर्ण तथ्य (Some significant Information About Kaziranga National Park in Hindi)

  1. अगर आप काज़ीरंगा भ्रमण करना चाहते हो तो आपको वहा हाथी या फिर jeep गाड़ी से ही भ्रमण करने दिआ जाएगा। जानवर और इंसानो के बिच संगर्ष न हो इसी कारन पैदल चलना वहां मना है। 
  2. क्या आप जानते है की साल के किन किन समय काज़ीरंगा भ्रमण बंद रहता है ? चलिए मई बताता हूँ।  दराचल आप May महीने के एक तारीख से October महीने के अंत तक यहां भ्रमण नहीं कर सकते। क्यों की इस समय Monsoon का बारिश आरम्भ होता है और इसी कारन यातायात व्यवस्था भी ठीक नहीं रह पाता। 
  3. क्या आप जानते है की दुनिआभर के जितने भी सैलानी काज़ीरंगा भ्रमण करने आते है उनके 80 प्रतिशत लोगो से भी ज्यादा लोग केबल एक सींग वाले गैंडे देखने की लालचा से ही यहां आते है। 


निष्कर्ष (Conclusion)

आशा करता हूँ की आपको ये लेख पचंद आया होगा। 

अगर काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्द्यान से सम्बंधित आपका हमारे लिए कोई भी सुझाव हो तो निचे जरूर टिप्पणी कीजिए। हम आपको जरूर जवाब देंगे। 

धन्यवाद। 

Monday, November 12, 2018

The Rich KARBI LANGUAGE


The Rich Karbi Language


Do you know that over 400 languages from south-east Asia, South Asia and East Asia’s belongs to Sino-Tibetan language family?

Yes!

It is around 1.69 billion people in this region, who speak languages closely related with Sino-Tibetan language families (Formed with Burmese, Tibetan and of course different Chinese languages).
 
Karbi language, Sino-Tibetan languages of north-east India
Source

But, why I am telling you these things?

Because our today’s topic Karbi language is a significant part of it, therefore it is necessary to know for us about the main source of its origin.

So now…………

You may know that Karbi’s are one of the most indigenous tribal communities of Assam including other north-eastern states of India.

In Assam, Karbi language is highly spoken in districts like Karbi-Anglong, Golaghat, Morigaon, Nogaon and Dima Hasao etc.

Do you know that over 4, 20,000 people live in the whole north-eastern region, who speaks in Karbi language?

Karbi language is also known by other two names, one is Aleng and another is Mikir. Mikir term is very popular in Assam.


Historical Aspects of Karbi Language

According to two great grammarians Shafer (1974) and Badly (1997), Karbi language was an aberrant of Kuki Chan Branch, because there are too many similarities have seen between these two forms.

Do you know that this language has been divided into two different parts within itself?

Yes!

They are Dumurali and Kamrupi Karbi. These two types are classified based on different dialects; if you listen to these two types for once then you can easily classify, which is Dumurali and which is Kamrupi.

Before 20th century this language was not came into scriptural form. In the
very early of 20th century American missionaries first gave it the written form, which was in Latin.

It was in 1903 when missionaries started to publish a newspaper in Karbi language with the named by ‘Birta’. Birta form is still famous among Karbi people as a part of their linguistic history.

Now-a-days this is scripted into two different linguistic forms, here one is Latin and another is Assamese.